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05/11/2022 Harsh Manaswi Inspiration Views 124 Comments 0 Analytics Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
कविता!
क्या ढूंढ रहे इस दुनिया में !
जब सब कुछ तेरे भीतर है !! 
क्यों बैठा है तू पिंजरे में!
जब आज़ाद गगन का तीतर है !! 

ये गगन तुम्हारी मंजिल है !
एक साहस भरी उड़ान दिखा  ! 
अब तोड़ दे हर जंजीरों को !
तू खुद की एक पहचान दिखा !! 

क्या देख रहा है औरों में!
तेरा मन ही सच्चा दर्पण है  !
अब इधर उधर से ध्यान हटा !
तेरा लक्ष्य की ओर समर्पण है !! 

तू कोशिश कर और करता जा!
मन में मंज़िल की चित्र बना ! 
गर आलस्य तुम्हारा दुश्मन है !
पुरुषार्थ को अपना मित्र बना !!  

                             

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