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18/02/2023 Kajal sah Awareness Views 138 Comments 0 Analytics Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
निबंध : प्रदूषित हों रहा है स्टेशन
गांधी जी का सपना था हमारा भारत देश पूर्ण रूप से प्रदूषित मुक्त बने और आज भी यह सपना गाँधी जी का पूरा नहीं हों पाया है, आज हमारे देश में प्रदूषण व्यपाक रूप से बढ़ते जा रहा है, प्रदूषण एक अभिशाप है जों हमारे देश कों आर्थिक, समाजिक, भौतिक इत्यादि रूप से भारत कों नुकसान पहुँचता है।
भारत देश कई गांव, शहरों, राज्यों इत्यादि का समूह है।
भारत देश का ही अंग कोलकाता जिसका सम्बन्ध पश्चिम बंगाल से है।
कोलकाता अपने स्थानों से फ़ूड तक बहुत जाना जाता है, लेकिन आज वर्तमान कोलकाता शहर में प्रदूषण दिन प्रति दिन व्यापक रूप से फैलता जा रहा है, आज सबसे अधिक कोलकाता के स्टेशन प्रदूषित होते जा रहें है,छोटे  से बड़े स्टेशन में कचड़े फेके हुए प्राप्त होते है, प्रदूषण के कारण बहुत अत्यधिक जानलेवा बीमारियाँ बढ़ते जा रही है,जिसे बहुत लोगों की मृत्यु हों रही है।
डस्टबिन होने के बाद मनुष्य कूड़े - कचड़े रेलवे के प्लेटफार्म, रेलवे के पटरी, ट्रेन के अंदर कूड़े - कचड़े फेकते है , आज केवल रेलवे पर ही प्रदूषण नहीं फैला हुआ है, आज हर जगह प्रदूषण मानव के माध्यम से फैलता जा रहा है, जिसे बहुत सारे वायु प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण इत्यादि बढ़ते  जा रहा है।
प्रदूषण के प्रभाव :
1.मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
2. मिट्टी और घरों पर प्रभाव
3. वनस्पतियों पर प्रभाव
4. पर्यावरण पर प्रभाव
5. अनेक सारी बीमारियों का उत्पन्न
6. देश की अर्थव्यवस्था अनियंत्रित
इत्यादि।

प्रदूषण से जन - धन दोनों कों बहुत प्रभाव पड़ता है, कोई भी प्रदूषण इसका प्रभाव जीव- जंतुओ से मानव जीवन का विनाश कर सकता है, इसलिए प्रदुषण कों अभिशाप भी कहा गया है।जिस प्रकार दीमक कोई वस्तु कों खोखला कर देता है ठीक उसी प्रकार प्रदूषण भी धीरे - धीरे प्रदूषित करके मानव जीवन का नाश कर सकता है। लोग जहाँ खाली देखते है वहां प्रदूषित कर देते है जैसे रेलवे प्लेटफॉर्म में थूक देना, प्लास्टिक, घरेलु कचड़े इत्यादि सभी कों फेक देते है, जिसके कारण यह प्रदूषण व्यपाक रूप ले चूका है।
रेलवे प्रदूषण का निवारण हम स्वयं कर सकते है क्युकी इस प्रदूषण के निर्माणकर्ता भी हम स्वयं है, हम मनाव है हमारे अंदर सोचने समझने, और अच्छे से कार्य करने की क्षमता है, जब हम इतने बुद्धिजीवी प्राणी है तो हम अपने जीवन या स्वयं कों ही क्यों नाश कर रहें है?
हर प्रदूषण का अंत हम स्वयं और जागरूकता से कर सकते है,जागरूकता कहने का तात्पर्य है लोगों कों जगाना, लोगों कों सोये हुए नींद से नहीं जगाना, लोगों के विचारों कों जगाना,लोगों के अच्छे कार्य कों जगाना, पर्यावरण के जिम्मेदारी के प्रति लोगों कों जगाना, इत्यादि।
प्रदूषण का सयंम बेहद ही जरुरी है, प्रदूषण नियंत्रित होने से हमारा स्वास्थ्य सही रहेगा, इसलिए जिम्मेदारी भी हमारी है, हमारे स्वास्थ्य के प्रति।
धन्यवाद : काजल साह :स्वरचित
                             

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